अफसरों के कहने पर उधारी की, अब तकाजों के फोन खराब कर रहे छुट्टियां

0
4

कोटा.
राज्य में सत्ता बदलने का असर बच्चों को स्कूलों और आंगन बाडिय़ों में मिलने वाले गर्म दूध पर पड़ रहा है। पैसा भुगतान न होने से गुरुजनों ने अपने दम पर योजना चलाई लेकिन अभी हालत यह कि उधारी अब शिक्षकों के गले पड़ गई। सुल्तानपुर ब्लॉक के सरकारी विद्यालयों में तो हालत यह कि भले ही गर्मी की छुट्टियां लग गई हों लेकिन अध्यापकों राहत नहीं मिल पा रही है। उन्हें अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत बजट के अभाव में उधारी पर लिए दूध के पैसे जमा करवाने की मांग के फोन परेशान कर रहे हैं। परेशान शिक्षकों ने सोमवार को ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में पहुंचकर समाधान की मांग की।
जानकारी अनुसार यहां बीते 3 माह से विद्यालयों में अन्नपूर्णा दूध योजना में बजट नहीं आया। बजट नहीं मिलने के बाद भी योजना जारी रखने के विभाग के निर्देश हैं, ऐसे में अध्यापकों ने उधारी की। कई शिक्षकों ने जेब से हजारों रुपए खर्च कर दिए। अब गर्मी का अवकाश लगने के बावजूद बजट नहीं मिला। ऐसे में अब दूध विक्रे ताओं का भी सब्र टूटने लगा है। अध्यापकों से अपने दूध के पैसे मांग रहे हैं, शिक्षक भी शर्मिंदा हैं।178 विद्यालयों पर बकाया पैसा-शिक्षा विभाग के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर ब्लॉक में कुल 178 विद्यालय आते हैं। करीब 13 हजार बच्चे अन्नपूर्णा दूध योजना के लिए पंजीकृत हैं। इनमें 35 रुपए प्रति लीटर प्रतिदिन के हिसाब से विद्यालयों पर 3 माह में अनुमानित 4 करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपए की राशि बकाया हो गई है। दूध के अलावा कुक कम हेल्पर व पोषाहार सामग्री की भी 2 माह की राशि बकाया है।बजट का इंतजारमामले में अतिरिक्त ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी सुल्तानपुर अंजू जागीरिवाल ने पत्रिकाडॉटकॉम को बताया कि अन्नपूर्णा दूध योजना में बजट के लिए जिला कार्यालय को अवगत करवाया है। बजट जारी करने के लिए वहां से जिला क लक्टर कार्यालय में फाइल रखी हुई बताई गई है। जैसे ही बजट जारी होगा, स्कूलों में आवंटित कर दिया जाएगा।
 
Source: Kota Rss
अफसरों के कहने पर उधारी की, अब तकाजों के फोन खराब कर रहे छुट्टियां