जानिए जेट एयरवेज जैसे संकट से बचने के लिए आपको एक कर्मचारी के तौर पर क्या करना चाहिए?

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नई दिल्ली। जेट एयरवेज ( Jet Airways ) के 17 अप्रैल को अस्थायी रूप से बंद होने के बाद जितना देश के एविएशन इंडस्ट्री ( Aviation Industry ) को धक्का लगा, उससे कहीं अधिक परेशनी जेट एयरवेज में कार्यरत कर्मचारियों को हो रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि जेट एयरवेज के बंद होने से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से करीब 23 हजार कर्मचारियों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। महीनों तक संकट के दौर से जूझ रही जेट एयरवेज की आखिरकार क्रैश लैंडिंग तब हुई जब सभी उधारकर्ताओं ने कंपनी के परिचालन के लिए पूंजी देने से इन्कार कर दिया। ऐसे में जेट एयरवेज के कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल एक यह भी है कि क्या जाॅब में उन्हें इंश्योरेंस ( insurance ) लेने से इस परेशानी से निजात मिल सकती थी। जेट एयरवेज ने बंद होने के बाद इन हजारों कर्मचारियों को वित्तीय अधर में छोड़ दिया है। आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंढने का प्रयास करेंगे कि क्या इंश्योरेंस इन कर्मचारियों को मौजूदा स्थिति से बचा सकता है? क्या दूसरे सेक्टर में नौकरी कर रहे करोड़ों वेतनकर्मियों के लिए इस तरह की संकट से निपटने के लिए इंश्योरेंस एक विकल्प हो सकता है?
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क्या हैं ये इंश्योरेंस ?
करीब 200 साल पुरानी इंश्योरेंस मार्केट अभी भी भारत में अपनी पकड़ नहीं बना पाया है। वर्तमान में, भारत में हेल्थ इंश्योरेंस या होम-लोन प्रोडक्ट्स के अतिरिक्त इंश्योरेंस को लेकर लोगों में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई देती है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के एक अधिकारी बताते हैं कि किसी प्रोडक्ट को बिल्ड करने और फिर उसे मार्केटिंग करने में कोई खास डिस्ट्रीब्युशन काॅस्ट नहीं लगता। पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय बाजार में यह पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है। इसीलिए सभी बीमा कंपनियां इसे स्कीम्स के समूहों के तौर पर बेचती हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें शुरू करने के लिए 1 से 3 महीनों का समय लगता है। आमतौर पर नौकरी चले जाने के बाद इंश्योरेंस कंपनी कुछ ईएमआई का कवर प्रदान करती हैं। इसमें घर किराए जैसे मासिक पेमेंट भी शामिल होता है। लेकिन, इसका भी कैप होता है जोकि आपकी कुल इनकम का 50 फीसदी हिस्सा होता है।
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यही नहीं, इनमें आपकी नौकरी जाने की असली वजह के बारे में भी शर्तें होती हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो बजाज आलियांज इस बीमा को अपने हेल्थ इंश्योरेंस के साथ देता है। लेकिन, उसकी शर्त ये है कि यदि आपकी नौकरी किसी गंभरी बीमारी की वजह से जाती है या छोड़नी पड़ती है, तभी आप इसका फायदा उठा सकते हैं। ऐसे में यदि आपके नियोक्ता ने आपको किन्हीं कारणों से बर्खास्त किया तो आपको इस बीमा कवर का कोई फायदा नहीं मिलेगा। यह भी संभव है कि आपकी कंपनी आपको किसी बड़े पैकेज पर नौकरी देती है तो भी आप इसका लाभ नहीं ले सकते हैं।
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क्या आपको भी इस तरह का इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए?
किसी भी कंपनी के खराब प्रदर्शन करने और उसके बंद होने की आशंका के बारे में अधिकतर कर्मचारियों को कुछ महीने पहले ही पता चलता है। ऐसे में वे इस हाई-रिस्क जोन से ठीक के दौरान इस तरह की कवर से खुद को सुरक्षित कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी तरह के बीमा कवर लेने से पहले सबसे पहली बात ये ध्यान में रखनी होती है कि उसकी नियम व शर्तें क्या हैं। इस तरह के इंश्योरेंस के लिए एक और बात ध्यान में रखनी होती है कि इसमें तीन महीनों के खर्च के लिए ये स्कीम कितना पर्याप्त है, क्योंकि कई बार आपको एक नौकरी ढूंढने में इससे भी अधिक समय लग जाता है।
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आपके पास क्या हैं दूसरे विकल्प?
इस तरह की संकट के स्थिति से बचने के लिए आपके लिए जरूरी है कि आप खुद का एक ऐसा फंड जमा करें जो इस तरह की परेशानियों काम आ सके। सबसे बेहतर तो यह होगा कि आपकी कुल कमाई का एक से तीन साल का खर्च ऐसी किसी आपातकाल की स्थिति से बचने के लिए जमा होना चाहिए। इस रकम में आपके खर्च ही नहीं, बल्कि आपके म्यूचुअल फंड व अन्य मासिक निवेश का खर्च भी शामिल होना चाहिए। इस तरह के वेतनकर्मियों को एक और बात ध्यान में रखनी चाहिए कि जैसे ही ऐसी किसी संकट का आभास हो तो आपको कुछ माह पहले ही अपनी ईएमआई का अधिकतम हिस्सा जमा करने का प्रयास करना चाहिए।
Source: business patrika
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