तीन महीने में जनपद का दूसरा जवान हुआ शहीद, परिवार गमगीन

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कानपुर देहात, 17 मई (उदयपुर किरण). जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को आतंकवादियों से मुठभेड़ में कानपुर देहात के जवान रोहित यादव के शहीद होने के बाद जिले में मातम पसरा है. जनपद ने हाल ही में अपना दूसरा जवान खोया है.
बीती 15 फरवरी को भी पुलवामा हमले में जनपद का एक जवान शहीद हो गया था. इसके बाद गुरुवार को फिर ऐसी खबर आने के बाद शहीद के घर पर आंसुओं का सैलाब फूट पड़ा. शुक्रवार को भी लोगों के शहीद के घर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा.
पुलवामा के डालीपोरा में गुरुवार सुबह सेना को कुछ आतंकियों के छिपे होनी की सूचना मिली. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाना शुरू किया. इस दौरान इलाके को खाली करा लिया गया. सुरक्षाबलों के तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने ओपन फायरिंग शुरू कर दी. घंटों चली जवाबी कार्रवाई में छह आतंकियों को ढेर कर दिया गया है. गोलीबारी में दो जवान भी शहीद हुए हैं. इनमें एक जवान कानपुर देहात के डेरापुर कस्बे के छोटे से गांव दिरवापुर में रहने वाला रोहित यादव भी है.
जवान के शहीद होने की खबर पाते ही परिवार की खुशियां गम में बदल गई. इसके साथ ही कस्बे और जनपद में शोक की लहर दौड़ गई. जैसे ही यह खबर ग्रामीणों को मिली वे शहीद के घर पहुचकर परिजनों को सांत्वना देने में जुटे हुये हैं.
2011 में सेना में भर्ती शहीद रोहित यादव 16वीं राजपूत रेजिमेंट का जवान था. उसके पिता गंगा सिंह भी सेना से सेवानिवृत्त हैं. रोहित की 24 अप्रैल 2016 को रुरा के अंगदपुर में रूबी से शादी हुई थी. उसने जैसे ही पति के शहीद होने की खबर सुनी वह बेहाेश हो गई.
परिवार में मां, पिता, भाई और बहन है. इसमें बहन प्रियंका की शादी हो चुकी है. रोहित की सेना में नौकरी लगने के बाद परिजनों में बड़े धूमधाम से प्रियंका का विवाह किया था. वहीं छोटा भाई सुमित अभी पढ़ाई कर रहा है. मां विमला देवी का भी रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं पिता का कहना है कि उन्हें बेटे पर गर्व है. वह भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हुआ है. सैनिक हूं, जानता हूं, देश का हित सर्वोपरि है. मेरे बेटे ने मेरा सीना चौड़ा किया है.
मौजूदा समय में रोहित की तैनाती 44वीं राष्ट्रीय रायफल पुलवामा में थी. उसकी आतंकियों से आमने-सामने भिड़न्त में हो गई थी. इस मुठभेड़ में शहीद जवान रोहित के साथ तीन अन्य जवान घायल भी हुए हैं.
तीन माह पहले भी जवान हुआ था शहीद 
तीन महीने पहले पुलवामा में आतंकियों ने घात लगाकर सेना के जवानों की बस को निशाना बनाया था. इसमें 42 जवान शहीद हुये थे. उनमें जनपद के डेरापुर के छोटे से गांव नोनारी में रहने वाला श्याम बाबू था. अभी जनपद अपने एक जवान के शोक से उभर नहीं पाया था कि एक ओर जवान की शहादत ने पूरे जनपद को शोकाकुल कर दिया है. सभी को अपने लाल के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन का इंतजार है.

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Report By Udaipur Kiran

Source: Udaipurkiran
तीन महीने में जनपद का दूसरा जवान हुआ शहीद, परिवार गमगीन