बगावत करने वाले नेताजी की चुनावी चौसर, भाजपा में खलबली..

0
3

कोटा। राज्य सरकार की ओर से नगर निगम के वार्डों का नए सिरे से परिसीमन करने की अधिसूचना के बाद शहरी क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों भी शुरू हो गई है। शहर में सभी वार्डों का अब नए सिरे से सीमांकन और परिसीमन होगा। शहर में 65 वार्ड से बढ़कर 100 वार्ड होंगे। इसमें निगम क्षेत्र में शामिल किए गए 35 गांवों में भी नए सिरे से वार्डों का सीमांकन होगा। अभी कुछ गांवों की स्थिति ऐसी है कि आधा क्षेत्र निगम में आता है और आधा ग्राम पंचायत में है। इससे विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं और जनता भी परेशान है। ग्रामीण क्षेत्र के वार्डों का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण सफाई व्यवस्था तक सुचारू नहीं हो पा रही है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की बगावती करने वाले पूर्व विधायकों ने चुनावी चौसर बिछाना शुरू कर दिया है। तीन पूर्व विधायकों ने अभी तक दबाव की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पूर्व विधायकों की सक्रियता से राजनीति भी गरमा गई है। इससे भाजपा में बेचैनी बढ़ गई है।
निगम की राजनीति के धुरी कहे जाने वाले पार्षद अभी से वार्डों के परिसीमन के गणित में लग गए हैं। मौजूदा बोर्ड में सबसे ज्यादा वार्ड कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के तथा सबसे कम रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के है। नए परिसीमन के लिए तय की गई गाइड लाइन के अनुसार सबसे ज्यादा वार्ड लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में बढऩे की संभावना है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों को आधार माना गया तो 10 से 12 वार्ड बढ़ेंगे। पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा मतदाता भी इसी विधानसभा क्षेत्र में बढ़े हैं। आबादी की दृष्टि से भी लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र बड़ा है। शहर में सबसे ज्यादा आवासीय कॉलोनियां इस क्षेत्र में ही विकसित हुई है। कोटा उत्तर विधानसभा के नदीपार क्षेत्र में भी तीन वार्ड बढऩे की संभावना है। अभी पांच वार्ड इस क्षेत्र में आते हैं। पिछले पांच साल में पूरा लैण्डर्मा सिटी आबाद हो गया है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक नई कॉलोनियां विकसित हुई है। कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में अभी 23 वार्ड है। कोटा दक्षिण विधानसभा में सबसे अधिक 24 वार्ड है। लेकिन क्षेत्र में नई कॉलोनियां विकसित नहीं हुई है। यह क्षेत्र सघन आबादी वाला है। इसमें जनसंख्या के आधार पर वार्डों को ही तोड़कर नए वार्ड बनाए जाने की संभावना है। रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में निगम के वर्तमान में चार वार्ड आते हैं। इस क्षेत्र एक से दो वार्ड बढऩे की संभावना है। उपायुक्तों के पद भी सृजित होपार्षद रमेश आहूजा न कहा कि निगम में 65 से बढ़ाकर 100 वार्ड करने से जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी। निगम में अभी चालीस फीसदी पद खाली है। इसलिए जिस तरह वार्डों का नए सिरे से परिसीमन हो रहा है। उसी तरह शहर के विस्तार के मद्देनजर उपायुक्त व अन्य अधिकारियों के पद सृजित करने की जरूरत है।
Source: Kota Rss
बगावत करने वाले नेताजी की चुनावी चौसर, भाजपा में खलबली..