सिंधी समाज की विचारधारा और संस्कार आज भी नहीं बदले : संजय मसंद

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बांसवाड़ा| सिंधी समाज की ओर से चल रहे झूलेलाल महोत्सव के पांचवें दिन समाज के गुरु और अहमदाबाद के सुखरामदास दरबार से साईं संजय कुमार मसंद ने भास्कर के साथ हुई खास बातचीत में कहा कि प्रदेश का पहला ऐसा जिला, जहां चारों ओर हरियाली ही हरियाली है। सिंधी समाज के उत्थान और इतिहास के बारे में उन्होंने बताया कि जिस इलाके से हम आए हैं, उसको दस हजार से ज्यादा साल हो गए है। सिंधु घाटी में निवास करते थे। सिंधु काल के बाद मुगलकाल फिर ब्रिटिश काल आए। फिर भी हमारी विचार धारा और संस्कार नहीं बदले। हमारी अच्छी सभ्यता रही है। फर्क इतना है कि कई लोगों ने धर्म परिवर्तन कर दिया। जिसने धर्म परिवर्तन नहीं किया, वो हिंदुस्तान में आकर बस गए। इसलिए संख्या में कम हो गए। लेकिन सबसे बड़ी खासियत यह है कि हमारे समाज में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिलेगा, जो भीख मांगता हो। समाज के लोग कभी झगड़ और दंगे फसाद में शामिल नहीं होते है। गुरु मसंद का मानना है कि टेक्नोलॉजी आना अच्छी बात है और ये हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है, लेकिन लोग सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। पहले जमाने में सिर्फ चिट्ठियां हुआ करती थी। मां की चिठ्‌ठी के लिए दो – दो महीने इंतजार करते थे। कई बार संदेश इधर-उधर होने पर संपर्क टूट जाता था। इसके बाद टेलीग्राम आया। किसी का टेलीग्राम आया होता तो समझ जाते थे कि कोई दुखद घटना हुई है। आज लोगों ने आज प्ले ग्राउंड छोड़ ही नहीं है। हर तरफ विकास चल रहा है। बच्चे एक कमरे में कैद से हो गए है। पर्यावरण नष्ट हो रहा है, पानी की कमी होती जा रही है। इन विषयों पर काफी चिंता जताई। साईं संजय कुमार मसंद की जीवन की शुरुआत मुंबई से हुई। 18 साल की उम्र में जहाज में मेरीटाइम की पढ़ाई फिर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मास्टर टेक्नोलॉजी में डिग्री की। इसके बाद थाइलैंड की कंपनी में जहाज में काम किया। 28 साल की उम्र में जहाज के कप्तान बने। फिर अमेरिका में मेनेजमेंट की पढ़ाई की। 2004 में काम छोड़कर धर्म और परिवार के लिए जीने की इच्छा हुई तो भारत आकर अहमदाबाद के एक मंदिर में सेवा करनी शुरू की। परिवार के भरण-पोषण के लिए कमाई भी करते रहे। इसके बाद धीरे-धीरे एक एकड़ में सुखरामदास दरबार बनाया। इसी तरह पूरे भारत में 21 मंदिर बनाए। हरिद्वार में एक विशाल धर्मशाला बनाई। मंदिर में गरीब 110 बच्चों की निशुल्क पढ़ाई और भरण-पोषण का खर्च उठा रहे हैं। मेडिकल कैंप भी लगाते हैं। हर साल 50 निशुल्क ऑपरेशन करवाते है। पूरा परिवार विदेश में रहता है। लेकिन मैं अपनी पारंपरिक जीवन और धर्म के लिए पति और प|ी दोनो मंदिर में रहते हैं। सिंधी समाज के गुरु संजय मसंद
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Source: Rajastahn
सिंधी समाज की विचारधारा और संस्कार आज भी नहीं बदले : संजय मसंद